मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ‘विष्णु के पाती’ ने बसंती राजवाड़े के संघर्ष को दिया संबल, भावुक हुईं स्व-सहायता समूह की महिला…
रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल ‘विष्णु के पाती’ के माध्यम से आम नागरिकों तक पहुंच रही आत्मीयता और संवेदनशीलता का एक भावुक उदाहरण सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कृष्णपुर की स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिला बसंती राजवाड़े के जीवन में देखने को मिला। मुख्यमंत्री द्वारा उनके संघर्ष, स्वरोजगार और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को आत्मीयता से उल्लेखित करते हुए पत्र लिखे जाने पर बसंती भावुक हो उठीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्र पाकर उन्हें बेहद खुशी हुई और कठिन समय में आगे बढ़ने का नया हौसला मिला है।
बसंती राजवाड़े ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए स्वरोजगार की राह चुनी। तीन बेटियों और माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने बिहान योजना के स्व-सहायता समूह से जुड़कर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋण प्राप्त किया और सरसों तेल निकालने का व्यवसाय शुरू किया। आज यही व्यवसाय उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बन गया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में बसंती के संघर्ष, साहस और बेटियों के भविष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने उनकी बेटियों आस्था, अंकिता और समीक्षा की शिक्षा का उल्लेख करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही माता-पिता की देखभाल और परिवार के प्रति उनके समर्पण को भी सराहा।
मुख्यमंत्री के पत्र से अभिभूत बसंती राजवाड़े ने कहा कि वे चाहती हैं कि उनकी बेटियां खूब पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें और जीवन में अपने फैसले स्वयं ले सकें। उन्होंने कहा कि जिस संघर्ष से उन्हें गुजरना पड़ा, उनकी बेटियों को वैसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री द्वारा बेटियों की शिक्षा और माता-पिता के प्रति उनके दायित्वों को याद किए जाने से उन्हें विशेष खुशी हुई।
भावुक स्वर में बसंती ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके पत्र और आशीर्वाद से उन्हें आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिली है। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि वे अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाएंगी तथा यह साबित करेंगी कि एक महिला अपने साहस, मेहनत और आत्मविश्वास से अकेले भी अपने परिवार को मजबूत आधार दे सकती है।
श्विष्णु के पातीश् के माध्यम से मुख्यमंत्री का यह आत्मीय संवाद केवल एक पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं के संघर्ष, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को सम्मान देने का प्रयास भी है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने परिवार और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर मेहनत कर रही हैं।


